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विधान सभा सचिवालय के अधिकारियों व कर्मचारियों ने दी अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां को 70वें जन्मदिवस की बधाई

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विधान सभा सचिवालय के अधिकारियों व कर्मचारियों ने दी अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां को 70वें जन्मदिवस की बधाई
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय के विभिन्न कर्मचारी संगठनों, पदाधिकारियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने हिमाचल प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां को उनके 70वें जन्मदिवस पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। बधाई संदेश में सभी ने उनके उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि एवं दीर्घायु की कामना की।
कुलदीप सिंह पठानियां अपना जन्मदिवस हर वर्ष अपने शुभचिंतकों, कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों के साथ अपने गृह जिला चंबा स्थित छलारा गांव में मनाते आए हैं। हालांकि, इस वर्ष वह राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन गए हैं। ऐसे में इस बार वह अपना जन्मदिवस अपनी पत्नी नीना पठानियां तथा सम्मेलन में भाग लेने गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के साथ केपटाउन में मनाएंगे।
पठानियां का जन्म 17 सितंबर, 1957 को जिला चंबा के छलारा गांव में हुआ था। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से बीएससी तथा लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद मात्र 28 वर्ष की आयु में वर्ष 1985 में पहली बार भटियात निर्वाचन क्षेत्र से विधान सभा सदस्य निर्वाचित हुए। इसके पश्चात वर्ष 1993, 2003 और 2007 में भी वह पुनः विधान सभा सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए।
उनकी काबिलियत, निष्ठा एवं नेतृत्व क्षमता को देखते हुए तत्कालीन वीरभद्र सरकार में उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं। इन जिम्मेदारियों का उन्होंने पूरी योग्यता, अदम्य साहस एवं सत्यनिष्ठा के साथ निर्वहन किया। दिसंबर 2022 में पठानियां पांचवीं बार विधान सभा सदस्य निर्वाचित हुए और 5 जनवरी, 2023 को सर्वसम्मति से हिमाचल प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष चुने गए।
विधान सभा अध्यक्ष के रूप में उनका अब तक का कार्यकाल अविस्मरणीय एवं अतुलनीय रहा है। विधायी कार्यों के व्यापक ज्ञान, प्रखर वक्तृत्व क्षमता और प्रभावशाली नेतृत्व के चलते उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित विभिन्न संसदीय सम्मेलनों में अपनी योग्यता एवं कार्यक्षमता का प्रभाव छोड़ा है। संसदीय परंपराओं, विधायी कार्यप्रणाली तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को मजबूती प्रदान करने में उनके योगदान को प्रशंसनीय एवं अनुकरणीय माना जाता है।

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