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हल्दी की खेती से प्रोसेसिंग तक बढ़ेंगी संभावनाएं, सड़क किनारे यूनिट स्थापित करने पर जोर

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सिक्किम –
भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) द्वारा आयोजित अध्ययन एवं अनुभव यात्रा के तहत सिक्किम के दौरे पर शिमला से पहुंचे मीडिया कर्मियों को हल्दी की खेती, प्रसंस्करण और इससे जुड़ी संभावनाओं की जानकारी दी गई। इस दौरान बताया गया कि क्षेत्र में हल्दी की खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ इसके प्रसंस्करण और मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की दिशा में नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। वर्तमान में करीब चार से पांच एकड़ क्षेत्र में हल्दी की खेती की जा रही है। उत्पाद की बिक्री के लिए करीब 300 रुपये प्रति किलो का अपना रेट तय किया गया है, जबकि बाजार में इसके दाम इससे अधिक भी मिल सकते हैं।
प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने को लेकर भी संभावनाओं पर चर्चा हुई। यदि कोई व्यक्ति स्वयं की प्रोसेसिंग यूनिट लगाना चाहता है तो इसके लिए लागत, सरकारी सहायता और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी महत्वपूर्ण होगी। बताया गया कि सरकार की ओर से स्थानीय स्तर पर काम करने वाले लोगों और कृषि आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहन देने की संभावनाएं हैं। इससे किसानों और स्थानीय उद्यमियों को कच्चे उत्पाद की बिक्री के बजाय उसका प्रसंस्करण कर अधिक मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है।
वहीं, क्षेत्र में श्रमिकों की उपलब्धता भी एक चुनौती है। बातचीत में कहा गया कि यहां काम करने वाले लोगों की संख्या अपेक्षाकृत कम है और यदि कोई व्यक्ति काम करने के लिए उपलब्ध होता है तो उसे बेहतर भुगतान मिल जाता है। ऐसे में कृषि उत्पादन के साथ प्रोसेसिंग गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त श्रमबल की उपलब्धता जरूरी है।
बताया गया कि यदि प्रोसेसिंग यूनिट सड़क के किनारे स्थापित हो तो गतिविधियों को संचालित करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। इसी दिशा में अपने स्तर पर गतिविधियां शुरू की गई हैं, ताकि स्थानीय उत्पादन को केवल कच्चे उत्पाद के रूप में बेचने के बजाय उसकी प्रोसेसिंग कर मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जा सकें। इससे स्थानीय किसानों के लिए बेहतर बाजार, आय के साथ-साथ रोजगार और स्थानीय स्तर पर उद्यमिता के नए अवसर विकसित होने की संभावनाएं हैं।

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