Advertisement

सरकारी प्रयासों से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचेंगे सिक्किम के जैविक उत्पाद

Spread the love

सरकारी प्रयासों से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचेंगे सिक्किम के जैविक उत्पाद
पीआईबी की अध्ययन एवं अनुभव यात्रा के दौरान शिमला से आए मीडिया कर्मियों को विशेषज्ञ ने बताई संभावनाएं
सिक्किम के जैविक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) द्वारा आयोजित अध्ययन एवं अनुभव यात्रा के तहत सिक्किम पहुंचे शिमला के मीडिया कर्मियों को जानकारी देते हुए विशेषज्ञ ने बताया कि विदेशों में ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पा रही है। ऐसे में सिक्किम और पूर्वोत्तर के किसानों के उत्पादों को बेहतर प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और वैल्यू एडिशन के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की बड़ी संभावनाएं हैं।
विशेषज्ञ ने बताया कि सरकार का जोर केवल जैविक खेती को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्पादन के साथ पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और निर्यात की पूरी श्रृंखला को मजबूत करने पर भी है। किसानों को बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने और उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में ऐसे प्रयास महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि सरकारी प्रयासों और निर्यात की संभावनाओं के बीच सिक्किम से करीब 10 टन लार्ज कार्डमम (बड़ी इलायची) का निर्यात किया गया है। उन्होंने कहा कि बड़ी इलायची समेत कई स्थानीय उत्पादों को प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के जरिए उच्च मूल्य वाले उत्पादों में बदला जा सकता है। इससे किसानों को केवल कच्ची उपज बेचने के बजाय तैयार उत्पाद से अधिक आय प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
पहाड़ी क्षेत्रों में जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान की चुनौती को देखते हुए सरकार और विशेषज्ञ हल्दी जैसी फसलों की संभावनाओं पर भी जोर दे रहे हैं। हल्दी को अपेक्षाकृत कम नुकसान पहुंचने वाली फसल के रूप में देखा जा रहा है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर हल्दी पाउडर और अन्य वैल्यू एडेड उत्पाद तैयार कर किसानों को बाजार से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकता है।
सिक्किम की पहाड़ी हल्दी की विशेषता बताते हुए विशेषज्ञ ने कहा कि यहां लखाडंगर और मेघातल जैसी किस्मों में करक्यूमिन की मात्रा काफी अधिक पाई जाती है। ऐसे विशिष्ट उत्पादों की पहचान कर उन्हें विशेष बाजारों के लिए विकसित और प्रमोट किया जा सकता है। इससे सिक्किम के जैविक उत्पादों को देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अलग पहचान दिलाने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि किसानों को सरकारी योजनाओं और बाजार की संभावनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें जमीनी स्तर पर खेती, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन की पूरी प्रक्रिया से परिचित कराना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से अध्ययन एवं अनुभव यात्रा के तहत प्रतिनिधिमंडल को फार्म का दौरा करवाकर जैविक खेती और वैल्यू एडिशन के कार्यों को प्रत्यक्ष रूप से दिखाया गया।
सरकारी प्रयासों का उद्देश्य जैविक खेती को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उसे प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और निर्यात से जोड़कर किसानों के लिए अधिक लाभकारी बनाना है। इससे एक ओर सिक्किम के विशिष्ट जैविक उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय किसानों की आय बढ़ाने और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *